उम्मीद
लू भरी धूप में भी
सूखी धरती के हृदय को हरा भरा
रखने का माद्दा रखती है
बारिश की एक टुकड़ा उम्मीद।
स्याह रातों को भी
उजालों से भरे भरे रखती है
भोर के मुस्कुराते
उजाले की एक टुकड़ा उम्मीद।
निराशा के अंधेरों से
अवसाद की गहरी खाइयों से
मृत्यु की घाटियों से वापस ले आती है
जीने की एक टुकड़ा उम्मीद।
बेहद नीरस मंजर में
हर ओर कंटीले बंजर में
एक बीज में
फिर से उगने की जिजीविषा
जगाती है एक टुकड़ा उम्मीद।
जीवन में बड़े-बड़े झंझावातों से
स्याह काली रातों से
मुश्किल से भी मुश्किल हालातों से
निकाल लाती है एक टुकड़ा उम्मीद।।
— अशोक दर्द
