स्त्री प्रेम
मैं जानती हूँ
शब्दों में नहीं
तुम्हारा प्रेम
उपस्थिति में है
स्वीकृति में है
तुम्हारी चुप्पी में है
उपेक्षा नहीं सम्वेदना है
ज़िम्मेदारी भरा अहसास है
मैं तुम्हारे डर पहचानती हूँ
वे जिन्हें तुम
मजबूती के पीछे छुपा लेते हो
तुम्हारी असफलताएँ
मुझे कमज़ोर नहीं करतीं
वे मुझे और पास ले आती हैं
मुझे हार–जीत नहीं
मुझे वह साथ चाहिए
जो कठिन दिनों में
कंधा बन जाए।
तुम्हारा साथ
हाथों में हाथ
एक विश्वास
जिसे किसी ढाल की जरूरत नहीं है
और हाँ— रिश्तों में मधुरता
शब्दों से नहीं
कभी-कभी
साथ चुप बैठने से भी
जन्म लेती है।
— नील मणि

सुंदर सृजन !