पुस्तक
ज्ञान है- अध्यातम है, विज्ञान है पुस्तक,
सृष्टि का कण- कण, प्राण है पुस्तक।
देव दानव- किन्नरों की, पहचान है यह,
माँ- बहन, बेटी का, सम्मान है पुस्तक।
मंदिर मे गीता, रामायण, पुराण भी यही,
मस्जिद गुरूद्वारे चर्च की, शान है पुस्तक।
अतीत- भविष्य, वर्तमान का लेखाजोखा,
बीते हुए युगों की, दास्तान है पुस्तक।
कर्मों का लेखा जोखा, निदान भी वर्णित,
जीवन के पल-पल का, विधान है पुस्तक।
इज्ज़त और आबरू, ईमान का विधान,
समाज के चेहरे का, परिधान है पुस्तक।
पूजा- पाठ, धर्म- कर्म, विज्ञान की कसौटी,
ईश्वर की भक्ति का, गुणगान है पुस्तक।
मेहनत का फल मिलता, पुस्तकों में लिखा,
चोर उच्चकों बेईमानों का, अपमान है पुस्तक।
राणा शिवा और लक्ष्मी की, आन- बान- शान,
राधा और मीरा के प्रेम का, बखान है पुस्तक।
वेद- उपनिषद की बात, पुराणों में छिपा ज्ञान,
सत्य की विजय गाथा, निर्वाण ज्ञान है पुस्तक।
अन्तरिक्ष पाने की चाह, ऋषि मुनियों का ज्ञान,
विजय ध्वज फैराना है, अभियान है पुस्तक।
चिड़िया की आँख का संधान, एकलव्य साधना,
मनुष्य के चरित्र का आधार, निर्माण है पुस्तक।
दादा और पिता का अभिमान, विरासत बताती,
जो कुछ बाकी रह गया, उसका नाम है पुस्तक।
— डॉ. अ. कीर्तिवर्धन
