कविता दिवस
आज कविता दिवस है
कविता लिखने मे व्यस्त है
कोई अपनी नई कविता
कहीं दर्द तो कहीं हास्य
कुछ न कुछ लिखने मे अभ्यस्त
सज रही हैं काव्य की महफ़िलें
हर शहरो शहर मे ,गांव गांव में,
और हम सबके दिलों में भी,
किरण किरण सज रही कविता,
कविता से ही मन की भावना
कविता से ही पुनीत साधना
कविता से ही साहित्य आराधना
कविता से ही हर मंगल कामना
कविता के सामर्थ को जानो
कविता के आदर्श को मानो
कविता का हर शब्द प्रेरणा
कविता से कविता पहचानो
जय का प्यार भरा नमन।
— जय प्रकाश भाटिया
