श्रीनाथद्वारा में दो दिन
साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा के सम्मान समारोह में सम्मिलित होने के लिए सपत्नीक मेरी यात्रा आगरा कैंट से 4 जनवरी 2025 को प्रारंभ हुई । मन में अपार उत्साह लिए रेलगाड़ी की भीड़-भाड़ को सहकर हमने रास्ते के मनोहर दृश्यों का खूब लुफ्त उठाया । सुबह तड़के हमारी गाड़ी श्रीनाथद्वारा के नजदीक पहुंच गई । यहां से हमें टैक्सी या बस से आगे का सफर तय करना था । संस्था द्वारा भेजी गई बस कुछ समय पहले ही कुछ साहित्यकारों को लेकर निकल गई थी । हमारी गाड़ी थोड़ी विलंब से स्टेशन पहुंची थी । एक सरकारी अध्यापक मिले वे भी साहित्य मंडल के लिए ही जा रहे थे । हमने बात की और किराया बराबर- बराबर बहन करने की सहमति बनाई । एक टैक्सी पकड़ी और कुछ ही समय में पहुंच गए श्रीनाथद्वारा । संस्था ने रहने व खाने की उचित व्यवस्था कर रखी थी । होटल में सर्वप्रथम नहाये-धोए ।
अब नाथद्वारा के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी । उदयपुर के पास स्थित यह एक वैष्णव तीर्थ है, जो 17वीं सदी के श्रीनाथजी मंदिर (हवेली) के लिए प्रसिद्ध है । यहां भगवान कृष्ण के 7 वर्षीय बाल रूप (गोवर्धनधारी) काले संगमरमर की मनोहारी मूर्ति प्रतिष्ठित है जिसे गोवर्धन से लाया गया था । यह स्थल पुष्टिमार्ग का मुख्य केंद्र माना जाता है । माना जाता है कि औरंगजेब के समय श्रीनाथजी की मूर्ति को मथुरा से सुरक्षित निकालकर मेवाड़ के सिहाड़ गांव में स्थापित किया गया था, जो आगे चलकर नाथ द्वारा कहलाया ।
नाथद्वारा के दर्शनीय स्थल जो बहुत प्रसिद्ध हैं, श्री विट्ठलनाथ जी का मंदिर, श्री वनमाली लाल जी का मंदिर, मीरा मंदिर, श्रीनाथजी की गौशाला, ब्रज दर्शन म्यूजियम, लालबाग, श्री गणेश टेकरी, राम भोला, बनास नदी, श्री वल्लभ आश्रम, हरिराय की जी बैठक, रक्त तलाई, हल्दीघाटी, कोठारिया का गढ़, रतनगढ़ आदि । साहित्य मंडल यहां की प्रसिद्ध साहित्यिक संस्था है ।
5-6 जनवरी 2025 (दो दिवसीय) कार्यक्रम के दौरान शहर की तमाम आकर्षक जगहों को देखा । बाजार नई नवेली दुल्हन की तरह सजे हुए थे । राजस्थानी पकवानों का मन भर कर लुफ्त उठाया । संस्था की व्यवस्थाएं तो काबिले तारीफ । सैकड़ों की संख्या में दर्शक, श्रोता व प्रतिभागियों ने श्री श्यामप्रकाश देवपुरा जी की व्यवस्थाओं की खूब तारीफ की ।
श्रीनाथद्वारा में प्रदूषण नहीं है, यह एक साफ सुथरा धार्मिक शहर है । पहाड़ों का नजारा तो अद्भुत है । यहां के निवासी ईमानदार, मृदुभाषी हैं । यहां हजारों की संख्या में यात्री आते हैं । द्वितीय दिन शाम को कार्यक्रम का समापन हुआ । स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था की गई । साथ ही रास्ते के लिए भोजन व घर के लिए श्रीनाथजी का प्रसाद भी दिया गया । संस्था ने स्टेशन तक बस की व्यवस्था की । इससे सफर आसान हुआ व असुविधा से निजात मिल गई। शाम को रेलगाड़ी से अपने शहर आगरा के लिए यात्रा प्रारंभ हुई, रातभर रेलगाड़ी ने भागकर हमें सुबह-सुबह आगरा पहुंचा दिया और इस तरह एक सुंदर, मजेदार यात्रा का समापन हो गया ।
— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
