कविता

उलझनों की भीड़ में कहीं खो गयी है ज़िन्दगी

सन्नाटों में उलझे विचार
हर मोड़ पर सवाल खड़े होते हैं
राहें गुम होती हैं, मंज़िल दूर है
कदम थकते हैं, मन ढ़लता है

भीड़ की चुप्पियों में
खुद की आवाज़ कहीं दब जाती है
हर खिड़की से झाँकती उम्मीद
धीरे-धीरे फुसफुसाती है

सपनों की धुंधली रोशनी
पलकों पर छुपी मुस्कान में बसी है
अनजानी राहों में बिखरे निशान
स्मृतियों की हल्की गूँज ले आते हैं

हर सवाल का जवाब ढूँढते कदम
धड़कनों की धुन के साथ चलते हैं
भटकी हुई आँखों में चमक
फिर भी आशा की किरण जगाती है

वो खोई हुई हँसी
वो अधूरी बातें
भीड़ में गुम हुई यादें
धीरे-धीरे लौटती हैं

मन की परतों में छुपी खुशी
हर दर्द के बीच खिलती है
उलझनों की भीड़ में भी
ज़िन्दगी की मिठास बनी रहती है

छोटे-छोटे लम्हों में
खुशियों की किरण झलकती है
हर अँधेरे को पार कर
नई उम्मीद उभरती है

दिल की गहराई में बसी आवाज़
धीरे-धीरे राह दिखाती है
ज़िन्दगी की राह में
हर चुनौती भी एक सिख देती है

उलझनों की भीड़ में कहीं खो गयी है ज़िन्दगी
पर हर मोड़ पर नयी रोशनी खिलती है
आशा, प्यार और हिम्मत के संग
हम फिर भी आगे बढ़ते हैं

— डॉ. अशोक

डॉ. अशोक कुमार शर्मा

पिता: स्व ० यू ०आर० शर्मा माता: स्व ० सहोदर देवी जन्म तिथि: ०७.०५.१९६० जन्मस्थान: जमशेदपुर शिक्षा: पीएचडी सम्प्रति: सेवानिवृत्त पदाधिकारी प्रकाशित कृतियां: क्षितिज - लघुकथा संग्रह, गुलदस्ता - लघुकथा संग्रह, गुलमोहर - लघुकथा संग्रह, शेफालिका - लघुकथा संग्रह, रजनीगंधा - लघुकथा संग्रह कालमेघ - लघुकथा संग्रह कुमुदिनी - लघुकथा संग्रह [ अन्तिम चरण में ] पक्षियों की एकता की शक्ति - बाल कहानी, चिंटू लोमड़ी की चालाकी - बाल कहानी, रियान कौआ की झूठी चाल - बाल कहानी, खरगोश की बुद्धिमत्ता ने शेर को सीख दी , बाल लघुकथाएं, सम्मान और पुरस्कार: काव्य गौरव सम्मान, साहित्य सेवा सम्मान, कविवर गोपाल सिंह नेपाली काव्य शिरोमणि अवार्ड, पत्राचार सम्पूर्ण: ४०१, ओम् निलय एपार्टमेंट, खेतान लेन, वेस्ट बोरिंग केनाल रोड, पटना -८००००१, बिहार। दूरभाष: ०६१२-२५५७३४७ ९००६२३८७७७ ईमेल - ashokelection2015@gmail.com