भजन/भावगीत

रघुराई

श्रद्धा प्रेम भक्ति भाव से गाऊॅं मैं सुबह-शाम,
सीताराम, सीताराम, सीताराम, सीताराम ।

पुकार सुनी रघुवर ने ऋषि-मुनियों संतों की,
पीर मिटाई रघुराई ने अपने प्रिय भक्तों की,
दुष्टों का संघार कर वसुधा पर उपकार किया,
शरणागत का उद्धार कर भव से पार किया,
चरणों में प्रभु जी तुम्हारे नव निधि सुख धाम ।

मर्यादा पुरुषोत्तम ने रक्षा की मर्यादाओं की,
बदली सोच समाज की भेदभाव प्रथाओं की,
सुग्रीव हनुमान विभीषण से जैसा प्यार किया,
केवट शबरी अहिल्या को वैसा ही स्वीकार किया,
मन बसे रघुनंदन जन-जन गाएं ये आठों याम ।

रामराज की स्थापना जीत ये दृढ़ संकल्पों की,
दूरदर्शी दृष्टिकोण और संभावित विकल्पों की,
प्रजा से “आनंद” प्रेम श्रीराम ने अपार किया,
राक्षसों का नाश कर अधर्म को तार-तार किया,
बजरंगबली जपते हरदम यहीं एक प्यारा नाम ।

श्रद्धा प्रेम भक्ति भाव से गाऊॅं मैं सुबह-शाम,
सीताराम, सीताराम, सीताराम, सीताराम ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु