नन्हे दोस्त
नन्हे-नन्हे दो दोस्त,
पानी से करते मस्ती रोज।
एक ने पाइप पकड़ लिया,
दूजे ने हँसकर खेल लिया।
छप-छप पानी गिरता जाए,
दोनों मिलकर हँसते जाएँ।
छोटी गाड़ी, छोटी साइकिल,
खेल में लगती बड़ी ही स्टाइल।
मिलकर खेलें, मिलकर हँसें,
दिनभर खुशियाँ साथ बसें।
न कोई डर, न कोई शोर,
मस्ती में डूबा हर इक ठौर।
पानी, मिट्टी, हँसी की बात,
यही है बचपन की सौगात।
— डॉ. प्रियंका सौरभ
