बाल कविता

नन्हे दोस्त

नन्हे-नन्हे दो दोस्त,
पानी से करते मस्ती रोज।

एक ने पाइप पकड़ लिया,
दूजे ने हँसकर खेल लिया।

छप-छप पानी गिरता जाए,
दोनों मिलकर हँसते जाएँ।

छोटी गाड़ी, छोटी साइकिल,
खेल में लगती बड़ी ही स्टाइल।

मिलकर खेलें, मिलकर हँसें,
दिनभर खुशियाँ साथ बसें।

न कोई डर, न कोई शोर,
मस्ती में डूबा हर इक ठौर।

पानी, मिट्टी, हँसी की बात,
यही है बचपन की सौगात।

— डॉ. प्रियंका सौरभ

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh