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आओ घूमने चलें पर्वतीय स्थल कुन्नूर

चाय के बागों की महक से सराबोर कुन्नूर, तमिलनाडु राज्य का अत्यंत मनोरम पर्वतीय स्थल है।पूरे रास्ते आते – जाते चाय के हरे खेतों में लहराती पत्तियाँ पर्यटकों का आलिंगन करती – सी प्रतीत होती हैं। तमिलनाडु के नीलगिरि जिले में स्थित यह एक सुंदर और शांत हिल स्टेशन है, जो हरे – भरे चाय के बागों, प्राकृतिक परिदृश्यों, आरामदायक मौसम तथा चाय कारखानों के लिए विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है । यह ऊटी से 19 किलोमीटर दूर है और समुद्र तल से 1850 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।कुन्नूर मेट्टुपलयम (28 किमी) और ऊटी के बीच मीटर गेज रेलवे लाइन पर स्थित है। कुन्नूर को कभी न सोने वाली घाटी के नाम से भी जाना जाता है।

नीलगिरि माउंटेन रेलवे सबसे पुरानी पहाड़ी रेलवे लाइन

नीलगिरि माउंटेन रेलवे (टॉय ट्रेन) की सवारी एक सुखद अनुभव है,जो कुन्नूर की यात्रा को रोमांचक एवं यादगार बनाती है। यह भारत की सबसे पुरानी पहाड़ी रेलवे में से एक है। इसे जुलाई 2005 में यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत घोषित किया गया था।रेलगाड़ी मेट्टुपलयम से शुरू होकर कुन्नूर की पहाड़ी पर चढ़ाई करती है और फिर ऊटी चली जाती है।यह जगह ट्रैकिंग, बर्ड वाचिंग तथा प्रकृति की सैर के लिए बहुत प्रसिद्ध है। जिला मुख्यालय ऊटी के बाद यह शहर नीलगिरि पहाड़ियों में दूसरा सबसे बड़ा शहर है। कुन्नूर में विभिन्न धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों का मिश्रण है। कुन्नूर की अर्थव्यवस्था यहाँ के फलते – फूलते चाय उद्योग पर बहुत निर्भर करती है। अधिकतर स्थानीय लोग चाय के प्रसंस्करण और बिक्री पर निर्भर रहते हैं। चाय उद्योग के साथ ही घर की बनी चाकलेट नीलगिरि की विशेषता है। भारतीय सेना की मद्रास रेजिमेंट का रेजिमेंटल मुख्यालय यहाँ है।

कुन्नूर के आकर्षण :

कुन्नूर की सुंदरता को निहारने के लिए गर्मी का मौसम सबसे उपयुक्त माना जाता है। यह छुट्टी बिताने वालों के साथ-साथ हनीमून पर आए नवविवाहित जोड़ों के लिए भी अत्यंत प्रिय स्थान है। ठहरने के लिए सब सुविधाओं से परिपूर्ण हर बजट के होटल यहाँ उपलब्ध हैं।

आसपास दर्शनीय स्थल

पर्यटकों के लिए कुन्नूर के आसपास अनेक मनमोहक दर्शनीय स्थल हैं, जिसके लिए पर्याप्त समय बिताया जा सकता है। कुछ प्रमुख स्थल इस प्रकार हैं –

सिम्स पार्क

पर्यटकों को घूमने के लिए यहाँ का सबसे मुख्य आकर्षण सिम्स पार्क है, जिसका नाम मद्रास क्लब के सन् 1874 के सचिव जेडी सिम के नाम पर रखा गया है। यह एक बागवानी रिजर्व है। इसका उद्देश्य पौधों की दुर्लभ प्रजातियों को संरक्षित करना है 12 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैले इस पार्क में पौधों की 1000 प्रजातियाँ हैं। वनस्पति उद्यान को जापानी शैली के आधार पर निर्मित किया गया है। इस पार्क में कैमेलिया, मैग्नोलिया, पेड़ फर्न और पाइन जैसी कुछ प्रजातियाँ संरक्षित हैं। ये यहाँ के ठंडे वातावरण में फलती – फूलती हैं। हर समय इनका आनंद लिया जा सकता है। इस पार्क का मुख्य आकर्षण हर वर्ष होने वाली फल एवं सब्जियों की प्रदर्शनी है, जिसमें विभिन्न प्रकार के कृषि और बागवानी के उत्पाद प्रदर्शित किए जाते हैं।

लैब्स राक

यह भी कुन्नूर का लोकप्रिय स्थल है। यहाँ पर ट्रैकिंग ट्रेल पर्यटकों को खूब लुभाते हैं। यह कुन्नूर से 9 किमी दूर है। यहाँ के चाय उद्यानों का शानदार दृश्य दिखता है। लैब्स राक से थोड़ा आगे लेडी कैनिंग की सीट है, जहाँ से नीलगिरि का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। लेडी कैनिंग की सीट से डाल्फिन सीट तक ट्रैक कर सकते

हैं।

लॉज फाल्स

यह राजसी झरना कुन्नूर से 5 किमी दूर मेट्टुपलयम के रास्ते में पड़ता है। यह पर्यटकों के मन को लुभाने वाला दर्शनीय स्थल है।

दुर्ग फोर्ट

कुन्नूर से 13 किमी दूरी पर स्थित दुर्ग एक किले का ध्वंसावशेषों के साथ अतीत में ले जाता है। टीपू सुल्तान ने 16 वीं शताब्दी में कभी इस किले का प्रयोग किया था।

डाल्फिन नोज व्यू प्वाइंट

डाल्फिन नोज व्यू प्वाइंट कुन्नूर से 10 किमी दूर है। डाल्फिन नोज एक चोटी है, जो डाल्फिन के नाक के आकार की है। पर्यटक यहाँ से केवल नीलगिरि पहाड़ियों के विशाल प्रसार को ही नहीं, अपितु कैथरीन फाल्स झरने की सुंदरता देखकर भी मुग्ध हो जाते हैं। यहाँ पर चाय की चुस्कियों के साथ प्राकृतिक सुंदरता को निहारते – निहारते पलक झपकने का मन भी नहीं करता।

पोलोलोजिकल (फल – कृषि विज्ञान) संस्थान

यहाँ राज्य कृषि विभाग का एक अनुसंधान केंद्र है। यहाँ पर तेंदू, अनार,खुबानी की छटा देखते ही बनती है। यहाँ पर रेशम उत्पादन भी होता है। राज्य सरकार यहाँ के सिल्क फार्म को संचालित करती है। गुएर्नसे फैक्ट्री नीलगिरि चाय उत्पादकों में सबसे प्रमुख है। पर्यटक यहाँ से अपने साथ चाय के डिब्बे ले जाना नहीं भूलते हैं।

ऊटी

ऊटी को पहाड़ी स्थलों की रानी के रूप में जाना जाता है। यह कुन्नूर के पश्चिमोत्तर में 19 किमी की दूरी पर स्थित है। यह अत्यंत लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। यहाँ कई झीलें, उद्यान और औपनिवेशिक स्थापत्यकला की विशेषता युक्त इमारते हैं।

कटारी फाल्स

यहाँ आकर्षण का मुख्य स्थल विद्युत स्टेशन है. जो सेल्स के निकट 1000 किलोवाट के आसपास बिजली की आपूर्ति करता है।

पेस्टर संस्थान

पर्यटकों को पेस्टर संस्थान को देखने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है। यह 1907 में शुरू किया गया था। यह संस्थान रैबीज और ट्रिपल वैक्सीन (डीपीडी, डीटी और टीटी) के लिए टीके विकसित करता है। यह ऊतक संवर्द्धन रेबीज प्रतिरोधक टीके (टीसीएआरवी) और डीपीटी समूह के टीकों का उत्पादन करता है।

सेंट जार्ज चर्च

अँग्रेजों के शासनकाल में निर्मित सेंट जार्ज चर्च भी देखने योग्य है।

कैसे पहुँचें कुन्नूर

कुन्नूर के लिए बैंगलुरू, मैसूर, कोयम्बटूर, मेट्टूपलयम, कालीकट, कन्याकुमारी,तंजौर, तिरुपति और कोचीन से नियमित बसें मिलती हैं। मेट्टूपलयम निकटतम रेलवे-स्टेशन है,जो 46 किमी दूर है। प्रमुख रेलवे जंक्शन कोयंबटूर 80 किमी है। कुन्नूर का निकटतम हवाई अड्डा 80 किमी दूर, कोयंबटूर में है। तो आओ चलें! कुन्नूर पर्वतीय पर्यटन-स्थल घूमने।

— गौरीशंकर वैश्य विनम्र

*गौरीशंकर वैश्य विनम्र

117 आदिलनगर, विकासनगर लखनऊ 226022 दूरभाष 09956087585