हास्य व्यंग्य

हास्य-व्यंग्य : साहित्यकारों का पेंशन के लिए आवेदन शून्य

जैसे ही ही सूचना मिली कि साहित्यकारों को भी पेंशन दिया जायेगा। साहित्यकारों में खुशी की लहर दौड़ गयी।
कुछ को शंका हुई। कुछ ने कानाफूसी की। कुछ ने सोचा कि मिल जाता तो जिंदगी का अंतिम पड़ाव गुजर जाता।

कुछ कवयित्रियों के भी मुंह में पानी आ गया। मिल जाता तो नई-नई साड़ियां खरीद लेती और साल भर में तीन बार मायके चली जाती। नवोदित रचनाकारों को महसूस हुआ बड़का-बड़का लेखक लपककर ले लेंगे। हम लोगों को तो गाजर, मूली की तरह उखाड़ कर फेंक दिया जायेगा।

कुछ ने कहा कि अगर सरकार पेंशन देती है तो मृत्यु शैय्या पर होने पर भी मेरी कलम चलती रहेगी। सरकार ही हमार माई-बाप है। सरकार का पैर गंगाजल से धोऊंगा। महीने में दो बार गंगा में डुबकी लगाऊंगा। दो चार पोथियाँ तो महीने में लिख ही जाऊँगा। इसी पेंशन से पुस्तकों का विमोचन करा लूंगा।

सरकार ने शर्त रखा जो अपने नाम के आगे तीन चार साल से वरिष्ठ साहित्यकार लिखता होगा। उसको अवसर मिल सकता है। सूचना मिलते ही जो कल से लिखना शुरू किया था वरिष्ठ साहित्यकार भूपेंद्र शर्मा लिखने लगा। एक कवयित्री ने भी नाम के आगे वरिष्ठ कवयित्री सुमंगला देवी लिख डाला।

अंतिम शर्त यह थी। लेखन से सन्यास लेने वाला ही आवेदन कर सकता है। आवेदन शुरू हुआ। लेखन से कोई सन्यास नही लेना चाहता था। आवेदन शून्य रहा। सरकार ने देखा कि कोई आवेदन नहीं आया। सन्यास कोई लेना नही चाहता। सरकार समझ गयी। सरकार ने निर्णय लिया कि साहित्यकारों के लिए किसी भी प्रकार का पेशन स्कीम नहीं लागू किया जायेगा।

— जयचन्द प्रजापति ‘जय’

*जयचन्द प्रजापति

प्रयागराज मो.7880438226 jaychand4455@gmail.com