सुनो…
मैं तुमसे प्यार ही नहीं
तुम्हारा गुस्सा भी चाहता हूँ
मैं नहीं चाहता कि तुम मेरी हाँ में हाँ करो
मैं तुमसे बहस भी करना चाहता हूँ
तुम मेरी अकड़ संभालना
मैं तुम्हारे नखरे झेलना चाहता हूँ
मैं चाहता हूँ कि तुम मना लो मुझे
मैं तुमसे हक से रूठना भी चाहता हूँ
जो तुम्हें महसूस हो
मैं वो एहसास भी बनना चाहता हूँ
मैं तुम्हारी जिंदगी का
एक खूबसूरत ख्वाब होना चाहता हूँ..!
— हेमंत सिंह कुशवाह
