आत्मकथा

मैं आम जनता का लेखक हूँ

मैं लिखता हूँ। बहुत बड़ा लिखक्कड़ नहीं हूँ। आम जनता का लेखक हूँ। उनके बातें होती हैं। उनका दर्द, उनकी पीडा़ तथा उनके हालातों पर मेरी कलम की निगाह रहती है। उन्ही के लिए उनकी आवाज अपने कलम के माध्यम से उजागर करता हूँ। 

मैं दुनिया के उन लोगों के प्रति सरल तथा सहज रहता हूँ। मेरी पूरी संवेदना उनके प्रति रहती है। जरुरत के हिसाब से मदद करता रहता हूँ। लेकिन यह मदद मैं शून्य समझता हूँ। समाज के उन कठोर दृष्टिकोण वाले लोगों को मैं यही कहूंगा कि जो सड़कों पर असहाय लोग हैं। मानसिक रुप से कमजोर हैं। उनको मदद के लिए आगे रहें। 

आप प्रयागराज के फुटपाथों तथा मंदिरों के आसपास बहुत से लोग असहाय हालात में तथा कुछ बुजुर्ग पुरुष, महिलायें बेहद निरीह हालातों में मिलेंगे। कुछ धनाढ्य लोग होटलों, रेस्टोरेंट में महंगे खाना खाकर चले जाते हैं। अगर मानवीय गुणों को और कारगर ढंग से जीना चाहते हैं तो कुछ महंगे खर्चों से बचाकर उन जो समाज पर ही आश्रित हैं। उनकों कुछ हद तक मदद कर सकते हैं। 

थोड़ा कम खायेंगे तो आप मोटापा से बच जायेंगे और सुगर, ह्रदय रोग तथा अन्य गंभीर होने वाले रोगों से बच सकते हैं। आपकी शरीर भी सुडौल रहेगी तथा गले तक न भरने से अच्छी पाचन शक्ति हो जाती है। जिस दिन ऐसा शुरुआत करते हैं। आप मानसिक रूप से भी मजबूत रहेंगे। जिम भी जाने से बच जायेंगे और एक नेक काम भी जायेगा। 

हम सदैव इनके लिए आवाज बनते रहेंगे तथा लोगों से अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों को आगाह करते रहेंगे। समाज के अंधभक्तों को चेताना मेरी नैतिक जिम्मेदारी है। यह जिम्मेदारी हर रचनाकार का है। जो इस जिम्मेदारी को अपनी जिम्मेदारी समझ कर कार्य नहीं करेगा। वह लेखक होने का भी गुण खोने जा रहा है। 

मानवता ही व्यक्ति के जीवन का सच है। जो इस सच्चाई से दूर रहेगा। वह एक निर्दयी प्रवृत्ति का माना जायेगा। इंसान को इंसान बनना पड़ेगा। इंसानियत ही सभी धर्मों का मूल भाव है। यही हमारे जीवन का एक लक्ष्य होना चाहिए। इन्हीं के बदौलत हमारी कलम की ताकत बनती है। 

— जयचन्द प्रजापति ‘जय’

*जयचन्द प्रजापति

प्रयागराज मो.7880438226 jaychand4455@gmail.com