हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – मियाँ मिट्ठू बनें

मियाँ मिट्ठुओं का जमाना है।यदि आपको अपने को ऊपर उठाना है,तो ये आपका जमाना है।आप जमेंगे ही नहीं,नाकों नाक तक तर माल में गड़ जाएंगे। आपका मुकाबला अच्छे -अच्छे क्या बड़े-बड़े अच्छे नहीं कर पाएँगे।बस आप मियाँ मिट्ठू बने रहिए।कोई कुछ भी कहे आप अपनी पर डटे रहिए। भले ही आपकी बात सोलह आने झूठ हो।भले ही आपकी सम्पत्ति का स्रोत खसोट – लूट हो।पर प्रश्रय देते रहिए आपसी फूट को।बस चमकाए रखिए अपने टाई- सूट को।

जब तक आप मियाँ मिट्ठू नहीं बनेंगे,भला आपको कौन जानेगा।आपकी महिमा को कौन मानेगा।इसलिए कुछ उखाड़-पछाड़, तोड़-फोड़ भी जरूरी है।तभी तो आपकी इच्छा हो सके पूरी है।वैसे आप जमाने से दूरी ही बनाए रखना। तभी तो आपको उसका मधुर लवण स्वाद पड़ेगा चखना।हो सकेगा तभी आपका पूरा हर सपना।अब अपने इतनी दूर बसे हुए सूरज को ही देख लीजिए।वह भी मियाँ मिट्ठू बनने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ता।वैशाख जेठ में दिन में दिखा देता है तारे पर दुनिया से मुख नहीं मोड़ता।शिशिर के कड़े शीत में आगमन की प्रतीक्षा करवाता है ; तो सावन भादों में मेघों में दुबक जाता है।सूरज भले ही वाणी से मौन है ,किंतु मियाँ मिट्ठू उससे बड़ा कौन है?

बड़ी – बड़ी कंपनियों वाले अपने घटिया माल का बढ़िया विज्ञापन करवाते हैं।जो खूबियाँ उनके माल में नहीं होतीं ,उनको हीरो- हीरोइनों को मोटा पैसा दे देकर झूठ कहलवाते हैं।उपभोक्ता भी हैं कैसे मूर्ख और नादान कि उनकी बातों में आ जाते हैं।यदि क्रीम लगाने से चमड़ी गोरी हो गई होती तो देश की सारी भैंसें गोरी चिट्टी गाय बन जातीं।पर आदमी है कि झूठ का दीवाना है। मैंने पहले ही कहा कि ये मिया मिट्ठुओं का जमाना है।

आप मेरी बात मानें। नेताओं की तरह दूसरों पर भरपूर कीचड़ उछालें।चलाते रहें अपनी मियाँ मिट्ठूपन की चालें।इस काम के लिए हो सके तो कुछ गुर्गे और चमचे भी पालें।फिर देखिए आपके कारनामे नहीं रहेंगे काले।अरे कुछ झूठ बोल कर ,झूठ में सच घोलकर, नाप तोलकर मियाँ मिट्ठू बने रहिए। आज के नेताओं से कुछ तो प्रेरणा लीजिए, कुछ सीखिए,मियाँ मिट्ठू अवश्य बने रहिए।

आप कहेंगे कि मियाँ मिट्ठू बनने के लिए हम क्या करें? बस झूठ की नाव में बैठ जाइए और अपनी नैया पार लगाइए।आपने देश और समाज के लिए क्या- क्या किया! इसी के गुण गाते रहिए ,दूसरों को नीचा दिखाइए और अपनी गुण- गाथा गाते रहिए।फिर क्या है नदी के बहाव में भी उल्टे बहिए।कोई क्या जाने कि आप कितने समर्पित हैं,समाज और देश हितार्थ संकल्पित हैं,देश की पीड़ा से आप कितने व्यथित हैं। यही सब कहिए,भले कुछ न किया हो। कुछ करिए भी मत। क्योंकि जिसे करना है ,स्वयं कर लेगा।आपको तो अपने प्रताप का झंडा ऊँचा उठाए रखना है।अखबार की सुर्खियां, सोशल मीडिया, मुखपोथी, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप सब पर छाए रहें।अपने मियाँ मिठत्व का स्वाद बढ़ाते रहें। ये देश ऐसे मियाँ मिट्ठुओं को ही पसंद करता है। ऐसों पर मरता ही नहीं अपनी जान भी छिड़कता है।

— डॉ. भगवत स्वरूप ‘शुभम’

*डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम'

पिता: श्री मोहर सिंह माँ: श्रीमती द्रोपदी देवी जन्मतिथि: 14 जुलाई 1952 कर्तित्व: श्रीलोकचरित मानस (व्यंग्य काव्य), बोलते आंसू (खंड काव्य), स्वाभायिनी (गजल संग्रह), नागार्जुन के उपन्यासों में आंचलिक तत्व (शोध संग्रह), ताजमहल (खंड काव्य), गजल (मनोवैज्ञानिक उपन्यास), सारी तो सारी गई (हास्य व्यंग्य काव्य), रसराज (गजल संग्रह), फिर बहे आंसू (खंड काव्य), तपस्वी बुद्ध (महाकाव्य) सम्मान/पुरुस्कार व अलंकरण: 'कादम्बिनी' में आयोजित समस्या-पूर्ति प्रतियोगिता में प्रथम पुरुस्कार (1999), सहस्राब्दी विश्व हिंदी सम्मलेन, नयी दिल्ली में 'राष्ट्रीय हिंदी सेवी सहस्राब्दी साम्मन' से अलंकृत (14 - 23 सितंबर 2000) , जैमिनी अकादमी पानीपत (हरियाणा) द्वारा पद्मश्री 'डॉ लक्ष्मीनारायण दुबे स्मृति साम्मन' से विभूषित (04 सितम्बर 2001) , यूनाइटेड राइटर्स एसोसिएशन, चेन्नई द्वारा ' यू. डब्ल्यू ए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड' से सम्मानित (2003) जीवनी- प्रकाशन: कवि, लेखक तथा शिक्षाविद के रूप में देश-विदेश की डायरेक्ट्रीज में जीवनी प्रकाशित : - 1.2.Asia Pacific –Who’s Who (3,4), 3.4. Asian /American Who’s Who(Vol.2,3), 5.Biography Today (Vol.2), 6. Eminent Personalities of India, 7. Contemporary Who’s Who: 2002/2003. Published by The American Biographical Research Institute 5126, Bur Oak Circle, Raleigh North Carolina, U.S.A., 8. Reference India (Vol.1) , 9. Indo Asian Who’s Who(Vol.2), 10. Reference Asia (Vol.1), 11. Biography International (Vol.6). फैलोशिप: 1. Fellow of United Writers Association of India, Chennai ( FUWAI) 2. Fellow of International Biographical Research Foundation, Nagpur (FIBR) सम्प्रति: प्राचार्य (से. नि.), राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सिरसागंज (फ़िरोज़ाबाद). कवि, कथाकार, लेखक व विचारक मोबाइल: 9568481040