कविता

इंसानियत का मान

भगवान के मंदिर में भी,
दीन देखकर भीड़ उमड़ती है,
करुणा की वो सच्ची पूजा,
दिलों में चुपचाप ही चढ़ती है।

तुम तो फिर भी आम इंसान हो,
क्यों इतना अभिमान लिए फिरते हो,
थोड़ा सा दिल को खोलो तो,
कितनों के भगवान बन सकते हो।

भूखे को रोटी, प्यासे को जल,
यही सबसे बड़ा दान होता है,
मूरत में नहीं, मन में बसता,
सच्चा ईश्वर वहीं महान होता है।

मंदिर-मस्जिद बाद में जाना,
पहले मानवता निभाना सीखो,
जिसके दिल में दया बसती है,
वही सच्चा भक्त है—यह समझो।

— डॉ. प्रियंका सौरभ

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh