ग़ज़ल
लोग कुछ पेड़ उगाते हुए मर जाते हैं
लोग कुछ पेड़ गिराते हुए मर जाते हैं
लोग कुछ नाम कमाते से हुए मर जाते हैं
लोग कुछ मौज उड़ाते हुए मर जाते हैं
लोग कुछ काम कराते हुए मर जाते हैं
लोग कुछ ख्वाब दिखाते हुए मर जाते हैं
फ़िक्र रखते न क़यामत की ज़रा भूल कभी
लोग कुछ जाम पिलाते हुए मर जाते हैं
बात करते नहीं मज़बूत ज़रा सी भी कभी
लोग कुछ दाँत दिखाते हुए मर जाते हैं
— हमीद कानपुरी
