समझौता
आओ चलो आज समझौता कर लें
थोड़ी समझदारी दिल में भर लें ।।
जब शरीर साथ न दे
पर तमन्नाएं फिर भी जोर मारें
तब गुणीजन यही कहते हैं
परिस्थिति अनुसार खुद को ढालें।
आओ चलो आज समझौता कर लें
थोड़ी समझदारी दिल में भर लें ।।
जरूरी नही है कि हर वक्त खुद की
अकड़ में ही रहा जाए
समय की नज़ाकत समझना ज़रूरी
समयानुसार हुंकार भरा जाए ।
आओ चलो आज समझौता कर लें
थोड़ी समझदारी दिल में भर लें।।
जब परिस्थितियां अनुकूल न हों
और अपनों का ही न मिले साथ
उस समय थोड़ा सा धैर्य जरूरी
टूटे नहीं कायम रखें खुद पर विश्वास।
आओ चलो आज समझौता कर लें
थोड़ी समझदारी दिल में भर लें।।
हमेशा एक सा समय नही रहने वाला
बस इतनी सी बात ध्यान रखनी है
एक अन्तराल बाद समय करवट लेगा
जिसने धैर्य रखा बस वही धनी है।
आओ चलो आज समझौता कर लें
थोड़ी समझदारी दिल में भर लें ।।
जब निराशा अन्दर तक भर जाए
और कोई भी जुगत काम न आए
खुद को करके प्रभु को समर्पण
अपने अन्दर खोया विश्वास जगाएं।
आओ चलो आज समझौता कर लें
थोड़ी समझदारी दिल में भर लें ।।
देखना बस कुछ ही पलों में
जबरदस्त कायाकल्प हो जाएगा
आपको जल्द महसूस भी न होगा
परिवर्तन अन्तर्मन घर कर जाएगा।
आओ चलो आज समझौता कर लें
थोड़ी समझदारी दिल में भर लें ।।
— नवल अग्रवाल
