मन की बात
क्या चलता मन में किसके
जान नहीं सकता कोई
कौन है अपना कौन पराया
बातों से पहचान नहीं सकता कोई
कब प्यार बदल जाए
नफ़रत में
जान नहीं सकता कोई
कोई आकर अनजान
बन जाए कब मीत कोई
किस घड़ी बदले वक़्त का मिजाज
नहीं जान सके कोई
आकर कोई चला जाएं कब
न जान सके कोई
ब्रजेश
