आज तुम्हारे ढोल से
आज तुम्हारे ढोल से, गूँज रहा आकाश।
बदलेगी सरकार कल, होगा पर्दाफाश।।
झूठे वादे गढ़ रहे, कर- कर मीठी बात।
जनता सब पहचानती, कैसी उनकी जात।।
सच की जब आँधी उठे, टूटे झूठा त्रास…
बदलेगी सरकार कल, होगा पर्दाफाश।।
कुर्सी पाकर भूलते, जनता का सम्मान।
अपने हित में बाँटते, सत्ता का सामान।।
अब जनमन के क्रोध से, डोले हर विश्वास…
बदलेगी सरकार कल, होगा पर्दाफाश।।
मतदाता जब जागता, समझे सारा खेल।
कर्मों का हिसाब खुले, टूटेगा यह मेल।।
मतपेटी की चोट से, बदलेगा इतिहास…
बदलेगी सरकार कल, होगा पर्दाफाश।।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
