नफरत के इस दौर में
नफरत के इस दौर में, कैसे पनपे प्यार।
ज्ञानी-पंडित-मौलवी, करते जब तकरार।।
धर्म नाम पर बाँटते, मन के कोमल तार।
अपनों में दीवार कर, तोड़े हर व्यवहार।।
कैसे फिर इस आग में, बचे स्नेह संसार…
नफरत के इस दौर में, कैसे पनपे प्यार।।
मंचों पर उपदेश हैं, भीतर रखते खार।
शब्दों में कटुता बसी, चेहरों पर चमत्कार।।
सच का दीपक ढूँढता, मानवता का द्वार…
नफरत के इस दौर में, कैसे पनपे प्यार।।
आओ मिलकर जोड़ लें, बिखरे मन के छोर।
प्रेम बने पहचान अब, मिट जाए यह शोर।।
हाथ पकड़ इंसान का, यही धर्म विचार…
नफरत के इस दौर में, कैसे पनपे प्यार।।
— डॉ. प्रियंका सौरभ
