कविता

सबसे बड़ा सबूत

दुनिया का सबसे बड़ा सबूत
जीतू ने रख दी।
बैंक के सामने

पूरी व्यवस्था को
मारा एक जोरदार थप्पड़

अकेले ही
दुनिया की संवेदनहीनता पर
बहन के जाने के बाद
बहन की गाढ़ी कमाई को
यूंही हड़पने नहीं देना चाहता था।
बैंक को

एक बेबसी थी
कितना तड़पा होगा भाई
कितना रोया होगा
कितनी हूक निकली होगी
तब कब्र खोदा होगा।

हाय रे, उड़ीसा के जीतू
कठोर व्यवस्था की
तूने कब्र खोदी है

कितने अभावों में जी रहा था
कितने सालों की कमाई थी
एक-एक पाई बचाकर बैंक में
भविष्य का कुछ सपना रखा था

उस सपने को
मरने नहीं देना चाहता था
इसलिए बहन को कब्र से
खोदकर लाया था

— जयचन्द प्रजापति ‘जय’

*जयचन्द प्रजापति

प्रयागराज मो.7880438226 jaychand4455@gmail.com