शिक्षा एवं व्यवसाय

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) : निरंतर संघर्ष और अदम्य साहस की एक अटूट गाथा

भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक नीट केवल किताबी ज्ञान का परीक्षण नहीं बल्कि एक युवा के धैर्य, समर्पण और उसके चरित्र की गहन शुद्धि का मार्ग है जहाँ हर साल लाखों छात्र अपने सुनहरे भविष्य की उम्मीद लेकर इस रणक्षेत्र में उतरते हैं और अपनी रातों की नींद और सुख-सुविधाओं का त्याग कर जीव विज्ञान के रहस्यों, भौतिकी के सिद्धांतों और रसायन विज्ञान की जटिलताओं को सुलझाने में अपना सर्वस्व झोंक देते हैं। यह यात्रा केवल एक प्रवेश परीक्षा पास करने के बारे में नहीं है बल्कि यह उस मानसिक दृढ़ता को विकसित करने की प्रक्रिया है, जो एक भावी डॉक्टर के लिए अनिवार्य है, क्योंकि जो बच्चा आज घंटों एक कुर्सी पर बैठकर एकाग्रता के साथ पढ़ सकता है वही कल ऑपरेशन थिएटर में घंटों खड़े रहकर जीवन बचाने का साहस जुटा पाएगा। इस परीक्षा की तैयारी के दौरान छात्र केवल विषयों को नहीं रटते, बल्कि वे समय प्रबंधन, दबाव में शांत रहने की कला और असफ़लता के डर पर विजय पाना भी सीखते हैं और यही वह ‘असाधारण योग्यता’ है जो उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करती है। समाज अक्सर केवल ‘रैंक’ और ‘स्कोर’ को देखता है लेकिन उन अंकों के पीछे छिपे हजारों घंटों के एकांत, परिवार की उम्मीदों का बोझ और ख़ुद को हर दिन बेहतर बनाने की जो ज़िद होती है वही असल में उस छात्र की असली सफ़लता है। यह सोचना कि “तुम वह संभालने में सक्षम हो जो दूसरे नहीं कर सकते” उन छात्रों के लिए एक संजीवनी की तरह है, जो बार-बार गिरकर भी उठने का जज़्बा रखते हैं और यह साबित करते हैं कि चिकित्सा का क्षेत्र केवल मेधावियों का नहीं, बल्कि उन जुझारू व्यक्तित्वों का है जो हार मानना नहीं जानते। चाहे कोई छात्र महानगर के महंगे कोचिंग संस्थान में पढ़ रहा हो या गाँव की किसी छोटी सी ढिबरी की रोशनी में, उनकी मेहनत का पसीना एक ही समान पवित्र है जो आने वाले समय में देश के स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ बनेगा और मानवता की सेवा के संकल्प को चरितार्थ करेगा। अंततः यह परीक्षा केवल डॉक्टरों का चुनाव नहीं करती बल्कि देश को ऐसे अनुशासित नागरिक सौंपती है जो चुनौतियों को अवसर में बदलना जानते हैं और जिनके कंधों पर भविष्य का सुरक्षित भारत टिका हुआ है।

— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।

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