कविता

जल की कीमत

छोड़िए
नादानी अब
जल की कीमत
एक -एक बूँद की।

संकट
आप खुद
पैदा कर रहे
जल की बरबादी कर।

गर्मी
फिर आई
जल संकट लेकर
आइना दिखा रही है।

वैश्विक
संकट बनेगा
पानी एक दिन
वो दिन दूर नहीं।

सावधान

लापरवाही छोड़ो

वरना तरसना पड़ेगा

जब जल हमें रुलाएगी।

सोचिए
केवल आप
कितना बर्बाद करते
उपयोग कम बेवजह बहाते।

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921

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