कविता

कमल खिला बंगाल में

तानाशाही का अंत हो गया, अबकी पश्चिम बंगाल में,
कमल पुष्प का उदय हुआ है, अबकी पश्चिम बंगाल में।
बांग्लादेशी घुसपैठियों रोहिंग्याओं को, अब जाना होगा,
विकास की नई लहर चलेगी, अबकी पश्चिम बंगाल में।

बंगाली भाषा का संरक्षण, संस्कारों का पोषण होगा,
भद्र जनों की संस्कृति का, पुनः वहाँ निरूपण होगा।
सीमाओं पर बाड़ लगाकर, राष्ट्र सुरक्षा सुनिश्चित होगी,
गुण्डों और मवालियों का, अब तृणमूल निरीक्षण होगा।

सरकारी सम्पत्तियों पर कब्जा, अतिक्रमण हटाया जायेगा,
बलात्कारियों के घरों पर, बुलडोज़र भी चलवाया जायेगा।
एयरपोर्ट पर स्वर्ण तस्करी, अबकी चर्चा बहुत सुनी है,
आतंकवादियों की रीढ़ पर, अन्तिम प्रहार कराया जायेगा।

पश्चिम बंगाल में कमल खिला, बंगला देश में मातम छाया,
पाकिस्तान में व्याकुलता बढ़ती, भारत सीमाओं पर छाया।
भीतर छिपे गद्दारों की भी, चिन्ता बढ़ती- नींद उड़ गयी,
प्रचंड बहुमत से एन डी ए सरकारें, विपक्ष पर संकट छाया।

— डॉ. अ. कीर्तिवर्द्धन

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