गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

पानी पर तस्वीर बनाकर देखी है
हमने बर्फ पे आग जलाकर देखी है।

अरमानों के तिनके हमने जला दिए
और फिर उनकी खाक उड़ाकर देखी है।

दिल की बातें दुनिया वालोंने कब समझी है
हमने सबको दिल की बात बताकर देखी है।

कौन सहारा बनता है तूफानों के आने पर
उनके इशारे पर नाव डूबाकर देखी है।

तेरी जीत मुकर्रर हो दिल ने बस ये चाहा
जीती बाजी फिर से दांव लगाकर देखी है।

सपने सपने होते हैं हकीकत कब होते
जानिब आंखों को रात जगाकर देखी है।

— पावनी जानिब सीतापुर

*पावनी दीक्षित 'जानिब'

नाम = पिंकी दीक्षित (पावनी जानिब ) कार्य = लेखन जिला =सीतापुर

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