गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

प्यार के गांव में इश्क की छांव में ये जीवन गुजर जाए पास महबूब हो छांव हो धूप हो वो दिल में उतर जाए कुछ कहें कुछ सुनें चार बातें करें हम से वो एक दो मुलाकातें करें मेरे तन मन को महका दे इस कदर बनके खुशबू बिखर जाए एक वो चांद है एक […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

धुआं उठता है जब जब कहीं पर आग लगती है समन्दर में हो घर लेकिन वहां क्या प्यास बुझती है। हजारों प्यार की बातें भूल जाता है हर इंसान अगर दिल को लग जाए वही एक बात चुभती है। बंधी रहती है सीमा में नदी ,मौज मे अपनी बहती है अगर सागर से मिलना हो […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तेरी पलकों का हर आंसू हथेली में छुपा लूं आ तुम्हारे दर्द को मैं अपने कलेजे से लगा लूं आ बहुत काटी है रो रो कर तुमने रातें अकेले में सुना कर गीत कोई मैं तुमको सुला लूं आ। नई कोई बात छेड़ो तुम नई को बात हम छेड़े वो जो दर्द में गुज़रे वो […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मुकद्दर है के अब हमसे संवारा ही नहीं जाता कोई बोझ है दिल पर उतारा ही नहीं जाता। कहें हम किससे हाल ए दिल आखों मे नमी है जुबां खामोश है हमसे पुकारा ही नहीं जाता। बह रही जिंदगी गम के उस वीरान दरिया में डूब कर उभरे फिर डूबे किनारा ही नहीं आता। अकेला […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

अश्क आंखों से हम गिरने न देंगे भले ही जान पे बन आई है। अश्क आंखों से गिर जाएं अगर तो इस में प्यार की रुसवाई है । तुम मेंरी आंखों से रूह में समाए हो मैं कैसे कह दूं की ये मेरी जुदाई है। मेरे सजदों पे हंसते थे दौलत वाले मेरे होंठों पे […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कच्ची मिट्टी के हमने मकान देखे हैं और बेघर भी हमनें तमाम देखे हैं। इन आंखों की नमी में कई समंदर हैं डुबा दें कश्ती मैंने वो तुफान देखे हैं। यहीं पे था आशियां महसूस होता है ढेर पर रेत की मैंने वो निशान देखे हैं। रज़ा जिसमें खुदा की शामिल थी वो फैसले भी […]

गीतिका/ग़ज़ल

पूछिए

दर्द ए दिल में हैं कैसा मज़ा पूछिए इश्क कितनी बड़ी है सज़ा पूछिए। देख कर मुझे क्यों नज़र फेर ली मेरे अश्कों की अबतो वजा पूछिए। जल रहा है ये दिल नहीं होश है मैने कितना किया है नशा पूछिए। है खिलौना ये दिल खेलते तुम रहे दर्द कितना है दिल में दबा पूछिए। […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बात कोई न थी पर खटकती रही मैं यूं खामोश तन्हा भटकती रही । दिल ने चाहा के हर दायरा तोड़ दूं चूड़ियां हथकड़ी सी खनकती रही। हाल ए दिल उनसे् कह पाए कभी बात होंठों पे आकर अटकती रही। रो न पाए के आंखों में तेरी तस्वीर है पर आंखों से ओस जैसी टपकती […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मुझे खबर न थी जिंदगी उस मोड़ पे लाएगी के मेरी दुआ भी उन तक पहुंच न पाएगी। नहीं खबर थी तुम मेरा साथ छोड़ जाओगे हंसते हंसते कली आंखों की भीग जाएगी मुझे अफसोस है तुमने मुझे नहीं पहचाना अब इसी सोच में मेरी उम्र गुजर जाएगी। इश्क करने का मतलब जलील होना है […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आंखों से हुई अश्कों की बौछार याद है हमको आज तक वो पहला प्यार याद है। हम चल दिए थे साथ हर दीवार तोड़कर हमको जो तुम पर था वो ऐतबार याद है। जाना हुआ ऐसा के तुम आए न लौटकर छोड़ा था जिसमें तन्हा वो बहार याद है। मुझको तड़पता देखके रोते तो तुम […]