कविता

दर्पण

दर्पण में
क्या देख सकता है बिंब?
केवल प्रतिबिंब,
उसे क्या लेना-देना?
वह तो दिखाता है
जैसा हो वैसा,
वह न तो है
चेहरों का‌ संग्रहालय
कि न तो है
आंसू का रुग्णालय,
वह कभी नहीं दिखाता है
कायर की भांति पीठ,
वह तो प्रहार करता है जानलेवा

सीने के सामने।

— पुष्करराय जोषी

पुष्करराय जोषी

पुष्करराय रेवाशंकर जोषी जन्म स्थल: राजुला (गुजरात) जन्म दिनांक:10/03/1955 शिक्षा:भी.कोम.;बी.एड गुजराती, हिन्दी, अंग्रेजी में लेखन अभी तक दस पुस्तक प्रकाशित गुजराती और हिन्दी पत्रिकाओं में कविता, लघुकथा,लेख प्रकाशित हो रहे हैं। अध्यात्म के यात्री होने से भौतिक प्राप्ति में रुचि नहीं है। आकाशवाणी और दूरदर्शन पर कार्यक्रम प्रसारित हो रहे हैं। पता: 479, गुजरात हाउसिंग बोर्ड, कणकोट पाटिया, कालावड रोड, राजकोट -360005 मो.नं.9925165164

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