कविता

समय (मधु मालती छंद)

हर पल बड़ा, बलवान है, सबका समय, भगवान है।
मेहनत से, मुस्कान है, सुंदर बने, दिनमान है।।

हिम्मत कर, विश्वास रख, मेहनत का, परिणाम चख।
रख हौसला, पाले विजय, कर साधना, हो दिग्विजय।।

छू ले गगन, सपना सजा, श्रम गीत गा, बाजा बजा।
सीढ़ी बना, विस्तार दे, नूतन सपन, आकार दे।।

सम्मान कर, तू काल का, चलते समय, गतिमान का।
थमता नहीं, डरना नहीं, बाधा कहीं, मुश्किल कहीं।।

राही कदम, रखना सही, मंज़िल मिले, इच्छित वही।
हर पल यहाँ, तो दौड़ हैं, सुख-दुख समय, का जोड़ हैं।।

कमजोर क्यूँ, इतना बना, तू है निडर, उर को मना।
होगी विजय, इस प्यास की, आत्मिक सुखद, विश्वास की।।

जगती सदा, आशा वहीं, जो धैर्य को, छोड़े नहीं।
तू समझ लें, इस बात को, पा सुखद सी, सौगात को।।

बीता समय, वापस कभी, आता नहीं, रोते सभी।
मौका मिले, कल हॉं नहीं, चिंता सदा, रहती वहीं।।

राहें बने , व्यहवार से, स्वीकृति सहज, स्वीकार से ।
आगे निकल, छोड़कर दुख, “आनंद” भर, जीतकर सुख।।

तू मत बिखर, कर प्यार कुछ, करता समय, ही कुछ न कुछ।
भीतर जगा, उस चाह को, तू सीख जा, उस वाह को।।

गतिमय समय, पल-पल घटे, खुश हो चला, संकट छटे।
कीमत समझ, कर जो चलें, शुभ ही सदा, प्रतिफल मिलें ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु

Leave a Reply