बहुत
बहुत दूर तक चले
पर कहीं पंहुचे नहीं
आज भी वहीं हैं
जहां पहले पड़े थे
बहुत दिनों तक सोचा था
पर वो सोच नहीं पाया
जो अचानक हो गया
अब पुनः सोच रहा हूं
बहुत आसान लगा था
तुम्हारे साथ बिताना
पर सबसे मुश्किल काम है
वो करना जो दिल चाहता है
बहुत चाहा था तुम्हें
उम्र भर थामे रखना
पर किस्मत ने कहा
अपनी यादों में बसा लो
बहुत कुछ कहना था तुमसे
सुनना चाहोगे क्या
हमारी जिंदगी के सफर में
हमराही बनना चाहोगे क्या
बहुत देर रूका, देखा, समझा
पर मन भटकता रहा
जब स्वयं की ओर लौटा
सब धुंध छंट गया
बहुत देर बाद समझ आया
समस्या जीवन में नहीं
उम्मीदों में बसी है
हमारी अपेक्षाओं में हैं
— श्याम सुन्दर मोदी
