मिलीभगत का परिणाम
वकील साहब
एक हत्या के मामले में
केस देख रहे थे
उनके मित्र जज थे
उन्हीं के अदालत में
मुकदमा चल रहा था
वकील साहब
जज साहब के घर गये
जज के हाथों में
नोटों की गड्डियां रख कर
बोले–मामला अपना है
मिलीभगत का परिणाम
अगले दिन
अखबारों की सुर्खियों में
‘हत्या का आरोपी
बाइज्जत बरी ‘
— जयचन्द प्रजापति ‘जय’
