गीतिका/ग़ज़ल

सफ़र

मन खोजता है बसर कहाँ
रास आये हमको घर कहाँ

पा ली ज़माने की ख़ुशी
उनके बिना है गुज़र कहाँ

नेकी सभी में देख ले
सबकी है ऐसी नज़र कहाँ

क्या चाहते, ना चाहते
दिल को है कोई ख़बर कहाँ

चलते तो हैं राहों में, पर
पहले सा अब वो सफ़र कहाँ

हम सा जहाँ में है कौन “गीत”
अपनी किसी को क़दर कहाँ

— प्रियंका अग्निहोत्री “गीत”

प्रियंका अग्निहोत्री 'गीत'

पुत्री श्रीमती पुष्पा अवस्थी