ग़ज़ल
रहते हैं मुहब्बत से तमाशा नहीं करते।
खुश रहते हैं हर हाल में दिखावा नहीं करते।।
तक़दीर बदल लेते हैं कर्मों से वो अपनी।
हो कोई सहायक ये सहारा नहीं करते।।
लिख देतें हैं इतिहास क़लम से वो जहाँ का।
खुद उनके होते शब्द चुराया नहीं करते।।
खूब हमने सजाई थी वो तस्वीर मुहब्बत से।
जाने ले गया कौन था ऐसा नहीं करते।।
रफ़्तार बहुत तेज है क़लम की हमारे।
इस बात को यूं यार भुलाया नहीं करते।।
कह दो तो बुला दें सरे महफ़िल भी यहीं पर।
इज्जत में इजाफा हो तो जाया नहीं करते।।
ये इश्क मुहब्बत नहीं आसान है इतना।
चक्कर में कभी प्रीती पराया नहीं करते।।
— प्रीती श्रीवास्तव
