कविता

भारत की जनगणना

भारत की जनगणना, जनगणना से जनकल्याण,
नई सुबह है, नया संदेश- जनगणना की ऋतु है आई।
सही-सही देना जानकारी, तभी बजेगी मधुर शहनाई ।।
जब जागेगा जन, गण, मन ! तब ही होगा परिवर्तन ।
भारत की जनगणना, जनगणना से जन कल्याण ।।

घर-घर में होगी दस्तक, जन-जन की होगी गिनती,
कितने अनपढ़ और कितने पढ़े, घर कच्चा है या पक्का,
जनगणना से सौम्य-शांत, सुखदाई होगा नवजीवन ।
भारत की जनगणना, जनगणना से जनकल्याण ।।

डिजिटल युग में डिजिटल होगी प्रथमबार जनगणना,
बिजली, पानी, शौचालय, रोजगार जैसे होंगे सवाल,
सही-सही देना जवाब, इसमें ही है हर जन की शान ।
भारत की जनगणना, जनगणना से जनकल्याण ।।

जाति-धर्म का भेद भूलकर प्रगणक का सहयोग करें,
सरकार को सटीक आंकड़े मिलेंगे, तब हम आगे बढ़ेंगे,
नवीन योजनाओं का होगा निर्माण, बनेगी राष्ट्र पहचान ।
भारत की जनगणना, जनगणना से जनकल्याण ।।

हर संकट मिट जायेगा, साफ होगा भविष्य का आईना,
खेत से लेकर सरहद तक बहेगी नवसृजन की बयार,
जनगणना है सुंदर- सुखमय भारत मां का आभूषण ।
भारत की जनगणना, जनगणना से जनकल्याण ।।

जन डरें नहीं ! गोपनीय रहेगा प्रत्येक नागरिक डाटा,
स्कूल -कॉलेज, अस्पताल, सड़कों का होगा विस्तार,
अपने भारतवर्ष के कोने-कोने तक पहुंचेगा पोषण ।
भारत की जनगणना, जनगणना से जनकल्याण ।।

— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

नाम - मुकेश कुमार ऋषि वर्मा एम.ए., आई.डी.जी. बाॅम्बे सहित अन्य 5 प्रमाणपत्रीय कोर्स पत्रकारिता- आर्यावर्त केसरी, एकलव्य मानव संदेश सदस्य- मीडिया फोरम आॅफ इंडिया सहित 4 अन्य सामाजिक संगठनों में सदस्य अभिनय- कई क्षेत्रीय फिल्मों व अलबमों में प्रकाशन- दो लघु काव्य पुस्तिकायें व देशभर में हजारों रचनायें प्रकाशित मुख्य आजीविका- कृषि, मजदूरी, कम्यूनिकेशन शाॅप पता- गाँव रिहावली, फतेहाबाद, आगरा-283111