नसीहत
“दादी मैं आपके लिए बढ़िया – बढ़िया सेब लायी हूँ, अब आप बिल्कुल ठीक हो जाएंगी।” नीलम ने कहा। दादी ने गर्दन घुमाई, आँखें इधर – उधर की सामने सेब की थैली थी, उसमें लगभग दो ढाई किलो सेब थे। दादी ने कपकपाते हाथ आगे बढ़ाए। “क्या हुआ इतना शोर क्यों है?” सोहरब ने पूछा। “अरे! कुछ नहीं, दादी को सेब दे रही थी।” नीलम ने जवाब दिया। सेब खराब निकलते ही दादी ने थोड़ा गुस्सा किया और समझाने लगी,”बिटिया कोई भी सामान जाँच परख के लेना चाहिए वरना पैसे बर्बाद हो जाते हैं।” नीलम ने सिर हिलाकर दादी की हाँ में हाँ मिलाई और खराब सेबों को दूर किया। प्यारी मुस्कान जगाकर बोली,”ठीक है दादी मैं सब समझ गयी, कभी भी आपको शिकायत का मौका नहीं दूँगी।” “ठीक है।” कहकर दादी अपनी चारपाई पर लेट गयी , नीलम ने पतली चादर ऊपर से डाल दी।
- अशोक बाबू माहौर
