भारी सम्पत्ति परन्तु जेब खाली
भारत में अक्सर हम सम्पत्तिवान तो हो जाते हैं, लेकिन जेब नकदी से खाली रह जाती हैं। कागज़ पर करोड़पति या जेब से खुशहाल? चुनाव आपका है!
भारत में रिटायरमेंट की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि लोग पूरी जिंदगी संपत्ति जोड़ने में लगा देते हैं, लेकिन आय बनाने पर ध्यान नहीं देते।
अक्सर रिटायरमेंट तक आते-आते लोगों के पास 2-3 मकान, जमीन, सोना और बैंक बैलेंस तो होता है, लेकिन हर महीने आने वाली नियमित आय (त्महनसंत प्दबवउम) बहुत कम होती है।
इसका परिणाम यह होता है कि कागज़ पर तो आप करोड़पति हैं, लेकिन खर्च करने में आज भी वही पुराना डर!
— एसी चलाने से पहले सोचना
— बाहर खाना खाने में झिझक
— दवाई के खर्च की चिंता
— एफडी टूटने या बाज़ार गिरने का डर
– बच्चों पर निर्भरता की मजबूरी
कड़वा सच यह है कि आपकी कुल सम्पत्ति (नेटवर्थ) नहीं, बल्कि कैश फ्लो मायने रखता है! समझिए, एक व्यक्ति जिसके पास रु. 5 करोड़ की संपत्ति है लेकिन मासिक आय सिर्फ रु. 25,000 है, तो वह कभी चैन की नींद नहीं सो पाएगा।
इसके विपरीत, वह व्यक्ति जिसके पास मात्र रु. 1.5 करोड़ के विभिन्न निवेश हैं और हर महीने रु. 1 लाख की स्थिर आय आ रही है, वही असली रिटायरमेंट का आनन्द ले रहा है। प्रॉपर्टी आपको खाना नहीं खिलाती, बल्कि कैश फ्लो खिलाता है।
इसलिए हमारी रिटायरमेंट प्लानिंग का असली लक्ष्य सिर्फ संपत्ति इकट्ठा करना नहीं, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था बनाना है, जिससे आपकी संपत्ति आपके लिए उपयोगी हो। विचार कीजिए कि क्या आपका पोर्टफोलियो आपको मानसिक शांति और आर्थिक आजादी देने के लिए तैयार है?
— राजेश पंडित
