कॉकरोच से क्रांति
कॉकरोच कहकर जिन्हें, समझा था कमजोर।
डिजिटल होते दौर में, वही बने सिरमौर॥
मीमों वाली चोट से, हिलने लगे विचार,
हँसते-हँसते बोलते, युवा हुए तलवार।
व्यंग्य बना प्रतिरोध अब, बदला पूरा दौर—
डिजिटल होते दौर में, वही बने सिरमौर॥
डिग्री लेकर घूमते, युवा हैं लाचार,
भर्ती वाली फाइलों में, बैठा भ्रष्टाचार।
ऊपर केवल भाषणें, नीचे टूटा छोर—
डिजिटल होते दौर में, वही बने सिरमौर॥
लाइक्स-हैशटैग से, बनते नव अभियान,
मोबाइल की स्क्रीन पर, लड़ता अब इंसान।
सत्ता के दरबार में, गूँजे जनता शोर—
डिजिटल होते दौर में, वही बने सिरमौर॥
कॉकरोच का नाम भी, बन बैठा हथियार,
अपमानों को ढालकर, लिख दी नई पुकार।
सौरभ कहे युवा नहीं, अब केवल कमजोर—
डिजिटल होते दौर में, वही बने सिरमौर॥
— डॉ. सत्यवान सौरभ
