कविता

कविता- कवि कुछ ऐसा गान लिखो


कवि कुछ ऐसा गान लिखो
कि
अंतर्मन की चेतना जागृत हो,
गूंज से दिगंत गुंजित हों,
अन्तस् परिवर्तित हो,
जीवन मोहक हो, रसवंत हो,
अंतर्द्वंद्व-अंतर्कशाय विलुप्त हो,
अन्तस् कटुता का अंत हो,
अंतर्कलह-अंतर्वेदना निष्पंद हो,
मानसी कुंठा ग्रस्त चेतना निराकृत हो,
ध्येयपूर्ण साहित्य अभिव्यंजित हो,
जनमानस की चेतना झंकृत हो,
नवल आशाएं अंकुरित हों,
आत्मविश्वास विकसित हो,
मन आल्हादित हो,
कुछ नया सीखने की ललक वर्धित हो,
एकता का सूत्र सुदृढ़ हो,
सुहृद जिज्ञासा प्रस्फुटित हो,
सद्भावना स्फुरित हो,
प्रेमिल संवेदनाएं प्रफ्फुलित हों,
सकारात्मकता संचरित हो,
प्रतिभाएं पल्लवित हों,
आनंद की आभा प्रज्वलित हो,
हवाएं हर्षित हों,
उद्यमिता उत्कर्षित हो,
प्रेरणाएं प्रकाशित हों,
कवि कुछ ऐसा गान लिखो
कि
अंतर्मन की चेतना जागृत हो.

— लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

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