बाल कविता – पिचकारी
मम्मी ला देना पिचकारी,
रंगबिरंगी प्यारी-प्यारी,
मैं भी होली खेलूंगा जम के,
रंगों की कर लूंगा तैयारी।
टोली बनाकर हम निकलेंगे,
रंग लगाएंगे झूमेंगे,
पिचकारी से छूटेगी धार,
मर्यादा नहीं भूलेंगे।
अबीर-गुलाल भी ला देना,
दही बड़े भी बना देना,
गुझिया तो खूब बनाई ही हैं,
सब मित्रों को खिला देना।
कोई कोरा छूट न पाए,
आंख में रंग न जाने पाए,
इतना मैं रखूंगा ध्यान,
रंग में भंग न पड़ने पाए।
— लीला तिवानी
