कोमल तानों की सुमन
(यादें शेष : सुमन कल्याणपुर)
स्वर की सरिता में मधुर गीतों से घुलता ‘प्रेम’ निराला,
कोमल तानों की पहचान, ‘सुमनजी’ का अद्भुत गान।
सुर सुबह की पहली किरण, मन को छूएँ हर स्पंदन।
भावों में गहराई शब्दों का मान, संगीत बना पहचान।
ना शोर, ना कोई प्रदर्शन, सादगी में छिपा आकर्षण।
हर धुन में ममता, राग में प्यार, ‘सुन’ झूम उठे संसार।
समय बदलता रहा निरंतर, उनका संगीत रहा अमर।
स्वर्णिम यादें पहचान, ‘कल्याणपुर’ का अनुपम गान।
स्वराकाश में चमके सितारा, संगीत जगत को संवारा।
पीढ़ियाँ गाएँगी गीत महान, युगों जीवित रहेगा स्थान।
— संजय एम तराणेकर
