मयूरा
रे मयूरा !
नाच के दिखा l
क्यों है खड़ा तू परेशान सा?
रे मानव!
नाचूँ मैं कैसे?
ना जंगल, ना बदरा
ना हरियाली, ना वर्षा l
पथरीली जमीन
सीमेंट की छतें l
ना दाना ,ना पानी ,
तुझे क्या है चिंता?
मेरी क्या है परेशानी ?
तेरे एसी हीटर ने
गर्मी बढ़ा दी
पर्यावरण बदलकर
हमारी तादाद घटा दी l
बदल रहा पंखों का रंग
फीका पड़ गया है l
नहीं दिखते आँसू ,
न दिखता दुखी मन l
अकेला खड़ा मैं l
बता कैसे नाचूँ?
रे मानव!
तू ही बता कैसे नाचूँ ?
— बृज बाला दौलतानी
