कविता

खेलो खेल

स्वस्थ तन-मन के लिए खेलो खेल,

विशुद्ध खेल भावना से खेलो खेल।।

मैदानी खेल से होता है शारीरिक व्यायाम,

बुद्धिबल जैसे खेलों से मन की जगे चेतना।।

एकता, सहयोग की होती है अनुभूति निर्मल,

ऊर्जा, उल्लास, आनंद से मन होता है तृप्त।। 

खूब पढ़ो, खूब खेलो, साथी संग धमाल ,

खेल है जीवनामृत, हो जीवन खुशहाल।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८

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