कुछ लोग
शाम को घर जल्दी जाने की चाहत में
दुपहरी में भी जल जाते हैं कुछ लोग ।
पालना सबके नसीब नहीं होता है
फुटपाथ पर भी पल जाते हैं कुछ लोग।
जरूरी नहीं खूबसूरती गोरापन ही हो
सांवली सूरत पर भी मचल जाते हैं कुछ लोग।
भांप लेते हैं समय की नज़ाकत को पहले ही
वक्त से पहले ही बदल जाते हैं कुछ लोग।
क़ीमती तो नगीनों जैसे पर काम के वक्त
खोटे सिक्कों में भी ढल जाते हैं कुछ लोग।
“साथी ” हैरान है देखकर पहचानी शक्लें
कैसे अजनबी चेहरों में बदल जाते हैं कुछ लोग।
— आशीष द्विवेदी “साथी “
