हारे लोग
हारे लोग
थके से लगते हैं
जीवन से
आनन्द नहीं मिल रहा है
पसीने से भीगे
अलग हटकर
सोंचने वाले
तुम पटरी से
जरूर उत्तर गये हो
एक बार
फिर से खड़े हो
पुनः पटरी पर
आ जाओ
एक रफ्तार
फिर आयेगी
तब तुम
आत्महत्या नही करोगे
एक वीर पुरुष
तुम्हे कहा जायेगा
तुम रणक्षेत्र में
एक योध्दा की तरह
कामयाब होगे
— जयचन्द प्रजापति ‘जय’
