जीवित रहने के मायने
हां देखा है मैंने लोगों को
जीवित रहने के लिए करते हुए कवायद,
दुआओं से लेकर
अपने इष्ठों से करते खुशामद,
धन,दौलत,जमीन,घर व बर्तन,
सब बेच चाहते हैं रखना
स्वस्थ अपना तन-मन,
मंदिरों,मस्जिदों,चर्चों,गुरुद्वारों के साथ ही
लगाते रहते हैं इस डॉक्टर से उस डॉक्टर के
घर आंगन के निश दिन चक्कर,
शारीरिक,मानसिक,आर्थिक रूप से डटकर,
सिर्फ बेहतर स्वास्थ्य के लिए,
इनके तन मन की पीड़ा
किया जा सकता है महसूस,
नजर आते कोई प्रसन्न तो
लगते दिखते कई तो नाखुश,
क्या नहीं आता होगा उनके मन में
अपनी इह लीला समाप्त कर लेने का ख्याल,
संघर्ष कर उबरने का मौका देता कुदरत बेमिसाल,
तो बताओ अरबों खरबों के
इस अमूल्य तन को समाप्त कर लेने के लिए
हम खुदकुशी जैसा वाहियात कदम उठाएं क्यों,
अपनी आंतरिक शक्ति को कीजिए जागृत
और बन जाएं ज्यों का त्यों,
ताकि सबको समझ आये जीवित रहने के मायने।
— राजेन्द्र लाहिरी
