कुण्डली/छंद दोहा छंद मुक्तक *चंचल जैन 30/07/202630/07/2026 0 Comments गुरुवर के आशीष से, खिलता जीवन बाग। सप्त सुरों के साज से, गूँजे मधुरिम राग। ज्ञान रुपी संजीवनी, शिक्षा करे प्रदान– विद्यार्थी ज्ञानी बनो, आलस का कर त्याग।।