शब्द-मोती
मित्रता श्रीकृष्ण सुदामा-सी,
जहां गरीबी-अमीरी,
पद, प्रतिष्ठा
का कोई तोल-मोल नहीं।
मित्रता स्नेहिल रिश्ता है,
दिल की बात सहज समझ लेता है।
मित्र अपने मित्र को पढ़ लेता है।
बिना कुछ कहे हाथ थाम लेता है।
कंधे पर रख हाथ साथ होने का अहसास कराता है।
