चौपाई छंद
कागज स्याही प्रेम जताएँ।
नैना झर-झर झरते जाएँ।
विरहन मन में प्रीत हुलारे।
चिठ्ठी में जड़ दूँ वे सारे।।
प्रियतम चिठ्ठी लिख ना पाऊँ।
अँसुवन मोती भर-भर लाऊँ।।
याद पिया की भूलूँ कैसे।
तड़पत जल बिन मछली जैसे।।
कागज स्याही प्रेम जताएँ।
नैना झर-झर झरते जाएँ।
विरहन मन में प्रीत हुलारे।
चिठ्ठी में जड़ दूँ वे सारे।।
प्रियतम चिठ्ठी लिख ना पाऊँ।
अँसुवन मोती भर-भर लाऊँ।।
याद पिया की भूलूँ कैसे।
तड़पत जल बिन मछली जैसे।।