सावन आया
तपती धरती ने चैन देख थोड़ा पाया,
रिमझिम-रिमझिम करता मनभावन सावन आया ।
मधुरिम-मधुरिम स्वर में कोयल गाती गाना,
अलबेला मौसम पपीहा हुआ दीवाना,
उमड़-घुमड़ बरसे मेघा मन बहुत लुभाएं,
जोर-शोर से चमक-चमक कर बिजुरि डराएं,
नन्हीं-नन्हीं बूॅंदों ने गीत सुहाना है गाया,
रिमझिम-रिमझिम करता मनभावन सावन आया ।
कहे सजनवा सजनी छोड़ो अब शर्माना,
बूॅंदों ने छेड़ी सरगम मौसम मस्ताना,
पंछी डोले मधुरस घोलें झूमें गाएं,
हो पागल मनवा प्रेमी नव ताल मिलाएं,
चली पवन ठंडी-ठंडी तन-मन हर्षाया,
रिमझिम-रिमझिम करता मनभावन सावन आया ।
पुराने दिनों को करें याद दादी-नानी,
छप-छप करती पानी में बिटिया रानी,
राजा बेटा खुशी से देख नाव चलाएं,
सहेलियॉं झूले झूला कजरी भी गाएं,
ढेरों खुशियॉं सखी री संग अपने लाया,
रिमझिम-रिमझिम करता मनभावन सावन आया ।
तपती धरती ने चैन देख थोड़ा पाया,
रिमझिम-रिमझिम करता मनभावन सावन आया ।
— मोनिका डागा “आनंद”
