गीत/नवगीत

सावन आया

तपती धरती ने चैन देख थोड़ा पाया,
रिमझिम-रिमझिम करता मनभावन सावन आया ।

मधुरिम-मधुरिम स्वर में कोयल गाती गाना,
अलबेला मौसम पपीहा हुआ दीवाना,
उमड़-घुमड़ बरसे मेघा मन बहुत लुभाएं,
जोर-शोर से चमक-चमक कर बिजुरि डराएं,
नन्हीं-नन्हीं बूॅंदों ने गीत सुहाना है गाया,
रिमझिम-रिमझिम करता मनभावन सावन आया ।

कहे सजनवा सजनी छोड़ो अब शर्माना,
बूॅंदों ने छेड़ी सरगम मौसम मस्ताना,
पंछी डोले मधुरस घोलें झूमें गाएं,
हो पागल मनवा प्रेमी नव ताल मिलाएं,
चली पवन ठंडी-ठंडी तन-मन हर्षाया,
रिमझिम-रिमझिम करता मनभावन सावन आया ।

पुराने दिनों को करें याद दादी-नानी,
छप-छप करती पानी में बिटिया रानी,
राजा बेटा खुशी से देख नाव चलाएं,
सहेलियॉं झूले झूला कजरी भी गाएं,
ढेरों खुशियॉं सखी री संग अपने लाया,
रिमझिम-रिमझिम करता मनभावन सावन आया ।

तपती धरती ने चैन देख थोड़ा पाया,
रिमझिम-रिमझिम करता मनभावन सावन आया ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु

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