लघुकथा

सरहदें याद आती हैं

राघव एक साधारण किसान परिवार का युवक था, जो सेना में भर्ती होकर देश की सीमा पर तैनात हो गया था। गाँव छोड़ते समय उसकी माँ ने उसके माथे पर हाथ रखकर कहा था, “बेटा, देश की रक्षा करना, लेकिन अपने गाँव को कभी मत भूलना।”

सरहद पर तैनाती के दौरान राघव ने कई कठिन रातें देखीं। बर्फीली हवाओं के बीच जब वह पहरा देता, तो उसे अपने गाँव का पीपल का पेड़, दोस्तों की हँसी और माँ के हाथों से बनी रोटी बहुत याद आती।

एक दिन डाक से उसे माँ का पत्र मिला। उसमें लिखा था, “तुम दूर हो, लेकिन तुम्हारी वजह से हमारा घर सुरक्षित है। तुम्हारी याद आती है, पर तुम्हारे साहस पर गर्व भी है।”

राघव ने पत्र को सीने से लगा लिया। उसकी आँखों में नमी थी, लेकिन चेहरे पर संतोष था। उसे समझ आ गया कि सरहद केवल दूरी नहीं बनाती, बल्कि रिश्तों और जिम्मेदारियों की गहराई भी सिखाती है।

उस रात राघव ने फिर सीमा पर पहरा दिया। दूर कहीं गाँव की यादें थीं और पास देश की रक्षा का कर्तव्य।

— डॉ. अशोक

डॉ. अशोक कुमार शर्मा

पिता: स्व ० यू ०आर० शर्मा माता: स्व ० सहोदर देवी जन्म तिथि: ०७.०५.१९६० जन्मस्थान: जमशेदपुर शिक्षा: पीएचडी सम्प्रति: सेवानिवृत्त पदाधिकारी प्रकाशित कृतियां: क्षितिज - लघुकथा संग्रह, गुलदस्ता - लघुकथा संग्रह, गुलमोहर - लघुकथा संग्रह, शेफालिका - लघुकथा संग्रह, रजनीगंधा - लघुकथा संग्रह कालमेघ - लघुकथा संग्रह कुमुदिनी - लघुकथा संग्रह [ अन्तिम चरण में ] पक्षियों की एकता की शक्ति - बाल कहानी, चिंटू लोमड़ी की चालाकी - बाल कहानी, रियान कौआ की झूठी चाल - बाल कहानी, खरगोश की बुद्धिमत्ता ने शेर को सीख दी , बाल लघुकथाएं, सम्मान और पुरस्कार: काव्य गौरव सम्मान, साहित्य सेवा सम्मान, कविवर गोपाल सिंह नेपाली काव्य शिरोमणि अवार्ड, पत्राचार सम्पूर्ण: ४०१, ओम् निलय एपार्टमेंट, खेतान लेन, वेस्ट बोरिंग केनाल रोड, पटना -८००००१, बिहार। दूरभाष: ०६१२-२५५७३४७ ९००६२३८७७७ ईमेल - ashokelection2015@gmail.com

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