लौकी संग मुस्कान
नन्हे हाथों थामकर,
बैठा हँसता लाल।
गोदी में लौकी लिए,
जैसे हरित विशाल॥
हरा-भरा यह फल कहे,
प्रकृति बड़ी महान।
इससे मिलकर सीख लो,
सादा सुंदर ज्ञान॥
छोटे मन की मुस्कान में,
छिपा बड़ा संसार।
हँसी बिखेरे एक पल,
मिट जाए संताप॥
फल, पौधे और पेड़ से,
रखना सदा ही नेह।
धरती माँ की गोद में,
मिलता सच्चा गेह॥
नन्हे कदम बढ़ते रहें,
लेकर सुंदर चाह।
सीख, सरलता, प्रेम से,
जग में पाए राह॥
— डॉ. प्रियंका सौरभ
