सामाजिक

सेवा, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल : श्रीमती सलमा शाह

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो केवल अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं करते बल्कि अपने सेवाभाव से पूरे समाज के लिए एक मिसाल बन जाते हैं मध्य प्रदेश के हरदा जिले के विकास खंड हंडिया के अंतर्गत आने वाले ग्राम मगरधा की रहने वाली श्रीमती सलमा शाह ऐसी ही एक प्रेरणादायक शख्सियत हैं एक आशा कार्यकर्ता के रूप में जमीनी स्तर से अपनी यात्रा शुरू कर आशा सुपरवाइजर के पद तक का उनका यह सफर संघर्ष अटूट लगन दृढ़ संकल्प और समाज सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की एक अनूठी दास्तां है सलमा शाह ने अपने कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी गांवों मगरधा मुरलीखेड़ा बंदी रेसलपुर झिरी बरखेड़ी,झुंड गांव गहाल और मोहनपुर में नियमित और बराबर भ्रमण किया उन्होंने कभी भी अपने कार्यक्षेत्र की सीमाओं को दूरी या कठिनाइयों के कारण आड़े नहीं आने दिया उनके कार्यकाल की प्रमुख विशेषताएं टीकाकरण अभियान गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के टीकाकरण शत-प्रतिशत सुनिश्चित करने में विशेष भूमिका हेल्थ एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम परिवार कल्याण मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियानों को ग्रामीण अंचल के घर-घर तक पहुंचाने में अतुलनीय योगदान और सक्रिय जन-सहभागिता हर स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता अभियान में ग्रामीणों को जोड़ना और स्वास्थ्य के प्रति उन्हें जागरूक करना उनकी कार्यशैली का मुख्य हिस्सा रहा है अपने समस्त दायित्वों को पूरी खूबी और जिम्मेदारी के साथ अंजाम देने वाली कर्तव्यनिष्ठ सलमा शाह का नाम आज उनके पूरे कार्यक्षेत्र में एक पहचान बन चुका है ग्रामीण उन्हें आदर और भरोसे के साथ याद करते हैं करियर की तमाम व्यस्तताओं और चुनौतियों के बावजूद श्रीमती सलमा शाह ने एक मां और गृहिणी के रूप में अपने कर्तव्यों का भी बखूबी निर्वहन किया उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश और शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया उत्कृष्ट शिक्षा उन्होंने अपने बच्चों को उच्च और उत्कृष्ट शिक्षा दिलाई उनकी इसी दूरदर्शिता और प्रेरणा का परिणाम है कि आज उनके सभी बच्चे डॉक्टर होने के साथ साथ  फार्मासिस्ट जैसे प्रतिष्ठित क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं लैंगिक समानता की मिसाल सलमा जी ने समाज की पुरानी सोच को दरकिनार करते हुए अपनी बेटियों को भी बेटों के बराबर उच्च शिक्षा दिलाई और उन्हें आत्मनिर्भर बनाया उनका यह कदम ग्रामीण समाज में महिलाओं की स्थिति को मजबूत करने वाला एक बड़ा संदेश है एक आशा सुपरवाइजर के रूप में उनकी जिम्मेदारियां काफ़ी विस्तृत और चुनौतीपूर्ण होती हैं इस पद पर रहते हुए उन्हें मुख्य रूप से आशा कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन क्षेत्र की सभी आशा कार्यकर्ताओं के कार्यों की मॉनिटरिंग करना और उन्हें समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन देना प्रशिक्षण और बैठकें स्वास्थ्य विभाग की नई नीतियों टीकाकरण शेड्यूल्स और कार्यक्रमों की जानकारी आशा कार्यकर्ताओं तक पहुंचाना और मासिक बैठकों का संचालन करना डेटा प्रबंधन और रिपोर्टिंग गर्भवती महिलाओं बच्चों के टीकाकरण और स्वास्थ्य सर्वे का डेटा तैयार कर उच्च अधिकारियों को समय पर रिपोर्ट भेजना और क्षेत्रीय निरीक्षण मैदानी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए गांवों का लगातार निरीक्षण और मूल्यांकन करना जैसे कार्य करने पड़ते हैं इन तमाम कठिन और भागदौड़ भरे उत्तरदायित्वों को संभालते हुए भी श्रीमती सलमा शाह आज भी उतनी ही चुस्त-दुरुस्त और ऊर्जावान हैं जितनी अपनी सेवा की शुरुआत में थीं उनकी इस फिटनेस और ऊर्जा का राज उनका संयमित जीवन नियमित दिनचर्या और सकारात्मक दृष्टिकोण है श्रीमती सलमा शाह की यह सक्सेस स्टोरी साबित करती है कि यदि इरादे मजबूत हों और सेवाभाव सच्चा हो तो कोई भी महिला अपनी मेहनत और लगन से न केवल अपना मुकाम खुद बना सकती है बल्कि पूरे समाज की तक़दीर और तस्वीर भी बदल सकती है ग्राम मगरधा और उनके कार्य क्षेत्र  सहित संपूर्ण हंडिया विकास खंड को अपनी इस कर्मठ बेटी और सुपरवाइजर पर गर्व है

— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह ‘सहज़’ 

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।

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